May 7, 2021

लक्षणों के आधार पर कोरोना मरीजों की पहचान संभव नहीं, स्टडी में आया सामने

लक्षणों के आधार पर कोरोना के रोगियों की पहचान मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। एपिडेमोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक शोध में यह दावा किया गया है। दिल्ली के एक अस्पताल में हुए इस शोध में कहा गया है कि कोरोना निगेटिव एवं पॉजीटिव रोगियों के लक्षण एक समान थे।

वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी विभाग के निदेशक प्रोफेसर जुगल किशोर के नेतृत्व में हुए शोध में दक्षिणी दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कोरोना के पॉजिटिव एवं निगेटिव रोगियों पर यह अध्ययन किया गया। इसमें 103 पॉजीटिव एवं 103 निगेटिव मरीजों को शामिल कर उनके लक्षणों का व्यापक अध्ययन किया गया।

शोध के अनुसार, दोनों समूहों में बुखार, कमजोरी, खांसी, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ, डायरिया, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी होने, सिर दर्द तथा भ्रम के लक्षण पाए गए थे। यह जरूर था कि जो कोरोना संक्रमित थे, उनमें इन लक्षणों के शिकार ज्यादा लोग थे और निगेटिव लक्षण वाले मरीजों में अपेक्षाकृत कम। इसी प्रकार कोरोना पॉजीटिव में 24 और निगेटिव में 65 लोग ऐसे थे, जिनमें कोई लक्षण नहीं पाए गए। प्रोफेसर किशोर के अनुसार दोनों समूहों में एक-दो मरीज ऐसे भी थे, जिन्होंने सूंघने की शक्ति के ह्रास की भी शिकायत की। शोध के अनुसार, दोनों समूहों में समान लक्षण होने के कारण बिना टेस्ट के कोरोना मरीज की पहचान और इलाज संभव नहीं है।

दूसरे, इस पूरे अध्ययन में यदि किसी व्यक्ति के कोरोना मरीज होने की संदेह की पुष्टि करने वाला यदि कोई तथ्य है तो वह पेशा और संपर्क का है। यदि लक्षण वाले किसी व्यक्ति की हिस्ट्री कोरोना मरीज के संपर्क में आने की है या वह स्वास्थ्य पेशेवर है तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उपरोक्त लक्षण पाए जाने पर वह कोरोना रोगी हो सकता है। यह शोध कोरोना उपचार में टेस्ट की अनिवार्यता को दर्शाता है। जबकि कोई बीमारी अस्तित्व में आ जाती है तो लक्षणों के आधार पर उसका उपचार होने लगता है, लेकिन कोरोना के मामले में ऐसा होता नहीं दिख रहा है।