March 4, 2021

ब्रिटेन का वातायन शिखर सम्मान केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को

रमेश पोखरियाल निशंक जो कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री है उन्हें ब्रिटेन का वातायन शिखर सम्मान देने की घोषणा की गई है लेखन, काव्य और अन्य साहित्यिक कार्यों के लिए देश के शिक्षा मंत्री माननीय डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटलों पर मिले सम्मान और पुरस्कार की सूची में एक अतिविशिष्ट सम्मान जुड़ गया है, जिस पर शिक्षा जगत से जुड़ा प्रत्येक भारतीय स्वयं को अलंकृत, वैभवशाली एवं गौरवान्वित अनुभव कर रहा है।

रमेश पोखरियाल को यह सम्मान लंदन की संस्था वातायन-यूके की तरफ से शनिवार को एक वर्चुअल समारोह में यह अवार्ड प्रदान किया जाएगा। निशंक को यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। अब तक यह प्रतिष्ठा सामान निंदा फाजली, राजेश रेड्डी, कुंअर बैचेन, अनिल जोशी, जावेद अख्तर और प्रसून जोशी को

प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डा. सत्येंद्र प्रसाद ने महान कवि विलियम ब्लेक के जन्म दिन के उपलक्ष्य इस पुरस्कार की स्थापना की थी !वातायन-यूके संस्था द्वारा यह अन्तरराष्ट्रीय शिखर सम्मान प्रदान किया जाता है।

एक बयान में शिक्षा मंत्री के प्रवक्ता ने कहा है कि
निशंक ने 75 से ज्यादा पुस्तकें लिखी है जिनका कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। इतना ही नहीं उनके नेतृत्व में बनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रशंसा भी देश-विदेश में हो रही है।

21 नंवबर को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दोपहर 3 बजे से रात 8.30 बजे तक वातायन-यूके सम्मान का आयोजन किया जाएगा इस मौके पर विशिष्ठ अतिथि प्रसिद्ध लेखक और नेहरू केंद्र लंदन के निदेशक डॉ अमीश त्रिपाठी होंगे।

माननीय मंत्री जी का स्वागत वातायन की अध्यक्ष मीरा कौशिक करेंगे वही केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल आगरा के उपाध्यक्ष कवि अनिल शर्मा जोशी और वाणी प्रकाशन की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी भी इस मौके पर मौजूद रहेंगे।

रमेश पोखरियाल निशंक तक का सफर

उत्तराखंड के गढ़वाल जिले के गांव पिनानी, जनपद पौड़ी में 1959 में एक अत्यंत निर्धन परिवार में माता स्व. विश्वेश्वरी देवी एवं श्री परमानन्द पोखरियाल के घर में जन्में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी ने 1980 में पृथक उत्तराखंड हेतु संघर्ष की शुरुआत की थी और 2009 में उत्तराखंड राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2014 से 2019 तक लोकसभा की सरकारी आश्वासन समिति के सभापति के रूप में अपनी सेवाएं दीं और वर्तमान में बतौर भारत सरकार के शिक्षा मंत्री के रूप अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. निशंक का प्रथम कविता संग्रह 1983 में प्रकाशित हुआ। विश्व में शायद ही किसी देश के पास ऐसा पढ़ा-लिखा, सूझवान और साहित्यिक शिक्षा मंत्री होगा, जो अब तक राजनैतिक एवं सामाजिक योगदान के साथ-साथ देश को साहित्यिक ऊर्जा देने का भी कार्य कर रहा हो। माननीय निशंक जी के 14 कविता संग्रह, 12 कहानी संग्रह, 11 उपन्यास, 4 पर्यटन ग्रन्थ, 6 बाल साहित्य और 4 व्यक्तित्व विकास सहित कुल 65 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

डॉ. निशंक जी की साहित्यिक कृतियों का जर्मन, क्रियोल, स्पेनिश, अंग्रेजी, फ्रेंच, नेपाली सरीखी विदेशी भाषाओं के अलावा तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, बंगला, संस्कृत और मराठी आदि भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इसके अलावा डॉ. निशंक जी के साहित्य पर देश और विदेशों में 16 शोध एवं लघु-शोध हो चुके हैं। मॉरिशस के तत्कालीन राष्ट्रपति सर अनिरुद्ध जगन्नाथ एवं तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम ने डॉ. निशंक के साहित्य को हिमालय जीवन के दुःख-दर्द एवं जीवत परिस्थितियों का साक्षात् प्रतिबिम्ब दर्शाने वाले साहित्यकार की उपाधि दी है, जिनकी लेखनी में उदार हृदय, विनम्र, राष्ट्रभक्त एवं संवेदनशील साहित्यकार झलकता है।