February 28, 2021

उत्तराखंड: देहरादून वालों को 2050 तक नहीं होगी पानी की किल्लत, सौंग बांध परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति मिली, 1200 करोड़ की लागत से बनेगा सौंग डैम

राजधानी को 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराने और रिस्पना नदी को पुनर्जीवन देने वाली सौंग बांध परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह जानकारी दी और कहा कि इससे बांध के निर्माण कार्य में तेजी आएगी।
देहरादून और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी | इस परियोजना से 2050 तक देहरादून शहर में रहने वालो लोगों को ग्रेविटी वाटर उपलब्ध हो सकेगा | राज्य सरकार लंबे समय से इस बहुप्रतीक्षित योजना को मंजूरी दिलाने का प्रयास कर रही थी |
कुछ समय पहले ही केंद्रीय जल आयोग ने इसके डिजाइन को मंजूरी दी थी। मूल रूप से सौंग नदी पर बनने वाले इस बांध की ऊंचाई करीब 148 मीटर है और इससे छह मेगावाट तक की बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। देहरादून में सौंधाना गांव के समीप प्रस्तावित यह परियोजना प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है।
इसके साथ ही इस बांध के अतिरिक्त पानी को देहरादून में रिस्पना नदी में छोड़े जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। रिस्पना को पुनर्जीवित करने के लिए प्रदेश सरकार ऋषिपर्णा के नाम से अभियान भी छेड़े हुए है। बताया गया कि यह पर्यावरणीय मंजूरी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवायजरी कमेटी की ओर से जारी की गई है। सौंग परियोजना से जुड़ी एक खास बात यह भी है कि इस परियोजना में मानव आबादी का बहुत कम विस्थापन होगा।
पीने के पानी से लेकर कृषि उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
सौंग बांध परियोजना की अनुमानित लागत करीब 12 सौ करोड़ रुपए है | परियोजना को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने नीति आयोग से वित्तीय मदद मांगी है | सौंग बांध की झील लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैलेगी, जबकि बांध की ऊंचाई करीब 148 मीटर होगी | इस बांध से ग्रेविटी आधारित पीने के पानी की आपूर्ति होगी | साथ ही प्रतिवर्ष बिजली के व्यय पर होने वाले करोड़ों रुपए की भी बचत होगी | इससे ऊर्जा उत्पादन में भी मदद मिलेगी, इसके अलावा सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता से कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा |