May 7, 2021

26% तक हिस्सेदारी की छूट देने कि RBI समिति ने निजी बैंकों में प्रवर्तको को सिफारिश की

निजी बैंकों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 15 साल में मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत करने की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक कार्यकारी समूह ने की है

केंद्रीय बैंक द्वारा गठित समूह ने यह भी सिफारिश की है कि बैंकिंग नियमन कानून में संशोधन और समूह के लिये निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के बाद बड़ी कंपनियों या औद्योगिक घरानों को बैंकों के प्रवर्तक बनने की अनुमति दी जा सकती है।

12 जून 2020 को रिजर्व बैंक ने भारतीय निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व दिशानिर्देश और कंपनी ढांचे की समीक्षा को लेकर आंतरिक कार्यकारी समूह का गठन किया था। शुक्रवार को केंद्रीय बैंक ने समूह की रिपोर्ट जारी की!

समूह को विचार के लिये जो विषय दिये गये थे, उसमें बैंक लाइसेंस के आवेदन के लिये व्यक्तिगत रूप से या इकाइयों के लिये पात्रता मानदंड, बैंकों के लिये तरजीही कंपनी ढांचा का परीक्षण तथा इस संदर्भ में नियमों को उपयुक्त बनाना एवं प्रवर्तकों तथा अन्य शेयरधारकों द्वारा बैंकों में दीर्घकालीन शेयरधारिता के लिये नियमों की समीक्षा शामिल हैं।

प्रवर्तकों की पात्रता के बारे में समूह ने कहा कि आपस में जुड़े कर्ज और बैंकों तथा अन्य वित्तीय तथा गैर-वित्तीय समूह इकाइयों के बीच कर्ज के मामले से निपटने के लिये बैंकिंग नियमन कानून, 1949 में संशोधन के बाद बड़ी कंपनियां/औद्योगिक घरानों को बैंकों का प्रवर्तक बनने की अनुमति दी जा सकती है।
समूह ने बड़े समूह के लिये निगरानी व्यवस्था मजबूत बनाने की भी सिफारिश की है।

समूह ने यह भी सुझाव दिया है कि बेहतर तरीके से परिचालित, 50,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक संपत्ति वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को बैंकों में बदलने पर विचार किया जा सकता है। इसमें वे इकाइयां भी शामिल हैं जिनका कॉरपोरेट हाउस है। लेकिन इसके लिये 10 साल का परिचालन का होना जरूरी शर्त होना चाहिए

इसके अलावा भी समूह ने यह भी सुझाव दिया कि संपूर्ण बैंकिंग सेवाओं (यूनिवर्सल) के लिये नये बैंक लाइसेंस को लेकर न्यूनतम प्रारंभिक पूंजी 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये की जानी चाहिए। वहीं लघु वित्त बैंक के लिये 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये की जानी चाहिए।