February 25, 2021

सरसों का तेल: जाने क्योंं बढ़ वनस्प्ति जैसे खाद्य तेल के दाम, कीमतों में आई 30 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी |

सभी खाद्य तेलों मूंगफली, सरसों का तेल, वनस्पती, सोयाबीन, सूरजमुखी और ताड़ की औसत कीमतों में बढ़ोतरी हुई है इन सभी तेलों की बढ़ती कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है सरसों के तेल पर ही 4 से 5 दिनों में 8 से रुपए प्रति किलोग्राम दाम तक बढ़ोतरी हुई है अगर पिछले साल की बात करें तो सरसों के तेल 50 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है इन तेलों के अलावा पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में भी 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है सरकार के लिए भी खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का कारण बनी हुई है यही कारण है कि सरकार खाद्य तेल कीमतों को कम करने के तरीकों को लेकर विचार विमर्श कर रही है

आपको बता दें कि देशभर में इस वक्त प्याज की चर्चा ज़ोर शोर से हो रही है. देश के अलग-अलग हिस्सों में ब्याज 70 रुपये किलो से लेकर 100 रुपये तक बिक रही है प्याज की बढ़ती कीमतों को भी कम करने के लिए आयात किया गया। लगभग 30,000 टन के आयात के कारण प्याज की कीमतें कम हो गई और आलू की कीमतें स्थिर हो गई हैं, लेकिन खाद्य तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह के समक्ष बातचीत हुई है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मूल्य निगरानी सेल से प्राप्त आंकड़े यह बताते हैं कि सरसों के तेल की औसत कीमत बीते गुरुवार को 120 प्रति लीटर थी, जबकि बीते साल ये कीमत 100 रुपये प्रति लीटर थी। इसके साथ ही वनस्पती तेल की कीमत एक साल पहले 75.25 थी जो अब बढ़कर 102.5 प्रति किलोग्राम हो गई है। सोयाबीन तेल का औसत मूल्य 110 प्रति लीटर पर बिक रहा था जबकि 18 अक्टूबर 2019 को औसत मूल्य 90 रुपये था। सूरजमुखी और ताड़ के तेल के मामले में भी यही रुझान रहा है।

तेल में होने वाले सम्मिश्रण को ब्लेंडिंग कहते हैं फूड इंस्पेक्टर रिटायर्ड केसी गुप्ता बताते हैं कि एक तय मात्रा के तहत सरसो के तेल में मिलाए जाने वाले दूसरे तेलों के सम्मिश्रण को ब्लेंडिंग कहते हैं. अभी तक सरसो के तेल में 20 फीसद तक ब्लेंडिंग होती थी. लेकिन सरकार ने इस पर रोक लगा दी है. इसके पीछे सरकार का तर्क है कि एक तो प्योर सरसो इस्तेमाल होने से सरसो की खपत बढ़ेगी. दूसरे यह कि कुछ लोग ब्लेंडिंग की आड़ में मिलावट का धंधा चला रहे थे.

अगर पिछले साल की बात करें तो सरसो का तेल 50 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है. हाल फिलहाल इसके दाम काबू में आते हुए नज़र नहीं आ रहे हैं. ब्लेंडिंग का खत्म होना, सरसो का इस साल कम उत्पादन होना और तेलों के लिए बनी विदेशी नीति में कुछ बदलाव होने के चलते यह असर पड़ रहा है. लेकिन बीते 4 दिन पहले प्रति क्विंटल सरसो के दाम में 300 रुपये की तेजी आने के बाद तेल के दामों में फिर से उछाल आ गया है.

आपको यह बताते हैं कि अब सरकार ने सरसों के तेल में अन्य किसी तेल की मिलावट में रोक लगा दी है 1 अक्टूबर से भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा सरसों तेल में मिलावट (Blending mustard oil) पर रोक लगा दी गई
इस पर सरकार का कहना है कि इस फैसले से उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरसों पैदा करने वाले किसानों को भी फायदा होगा.

अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि मलेशिया में पिछले छह महीनों में पाम तेल उत्पादन में कमी एक बड़ा कारण है देश में लगभग 70% ताड़ के तेल का उपयोग फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में किया जाता है, जो कि सबसे बड़ा थोक उपभोक्ता है। उद्योगों के मुताबिक अब सरकार को यह विचार करना है कि क्या ताड़ के तेल के आयात शुल्क को कम किया जाए क्योंकि ताड़ के तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे अन्य खाद्य तेलों की कीमतों पर प्रभाव डालती है।