February 27, 2021

2019 में राज्यों की पुलिस भर्ती में 21 फीसदी और CAPF में 51 फीसदी की गिरावट आई

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार राज्यों में पुलिस कांस्टेबल और उप-निरीक्षकों की भर्ती में 2019 में 2018 की तुलना में 21 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई. वहीं, सीएपीएफ की भर्ती में साल 2019 में में 51 फीसदी से अधिक की कमी आई|

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR & D) की रिपोर्ट के अनुसार राज्यों में पुलिस कांस्टेबल और उप-निरीक्षकों की भर्ती में 2019 में पिछले वर्ष की तुलना में 21 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई. वहीं, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) की भर्ती में साल 2019 में 2018 की तुलना में 51 फीसदी से अधिक की कमी आई.सीएपीएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है. वहीं, राज्यों ने पिछले वर्ष की 1,50,690 ऐसी भर्तियों की तुलना में 1,18,262 भर्ती की जिसमें 1,05,353 कांस्टेबल और 12,909 उप-निरीक्षक शामिल हैं|

2019 में 14,541 सीएपीएफ कांस्टेबल और असिस्टेंट कमांडेंट्स भर्ती किए गए. इनमें से 9,339 कांस्टेबल अकेले रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के थे, जिसका कंट्रोल रेल मंत्रालय के पास है. गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सीमा सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल और भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की संख्या 2,867 रही. सीएपीएफ में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 11,09,511 है और 9,82,391 पद भरे हुए हैं|

सीआरपीएफ राज्य सरकारों को कानून और व्यवस्था के रखरखाव में सहायता करता है और विभिन्न आंतरिक ऑपरेशन्स में हिस्सा लता है. वहीं, बीएसएफ, आईटीबीपी, असम राइफल्स और एसएसबी सीमा सुरक्षा बल हैं, लेकिन वे जरूरत पड़ने पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने और आंतरिक सुरक्षा के लिए मदद भी करते है|

राष्ट्रीय स्तर पर राज्य पुलिस में स्वीकृत 26,23,225 पदों में 5,31,737 पद खाली हैं. राज्य पुलिस में महिलाओं की संख्या कुल 2,15,504 थी जिसमें साल 2018 की तुलना में 16.05 फीसदी की वृद्धि हुई|

रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 47,897 कांस्टेबल की भर्ती हुई. इसके बाद तेलंगाना में 14,933, गुजरात में 9,159, पश्चिम बंगाल में 6,785 और हरियाणा में 6,647 कांस्टेबल की भर्तियां हुई. वहीं, 5 अगस्त, 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए जम्मू और कश्मीर में केवल 836 कांस्टेबल भर्ती किए गए थे. बीएचआरएंडडी (BPR&D) गृह मंत्रालय का पुलिस थिंक टैंक है जो साल 1986 से पुलिस ऑर्गेनाइजेशंस पर सालाना डेटा पब्लिश कर रहा है|