February 25, 2021

बुलेट ट्रेन: वाराणसी-नई दिल्ली हाईस्पीड कॉरिडोर में लिडार तकनीक से सर्वे को मंजूरी, वाराणसी से अयोध्‍या तक बुलेट ट्रेन

नई दिल्‍ली से वाराणसी तक बनने वाले हाईस्‍पीड रेल कॉरिडोर के लिए लिडार तकनीक के प्रयोग को हरी झंडी दे दी गई है। इसके साथ ही अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज को भी हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी देने की तैयारी है। इस लिहाज से माना जा रहा है कि अब वाराणसी से अयोध्‍या होते हुए बुलेट ट्रेन को भी मंजूरी जल्‍द मिल सकती है। दरअसल लिडार प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का उपयोग करके सड़कों, भूतल परिवहन, नहरों, भूस्खलन के साथ ही नगर नियोजन और सिंचाई से संबंधित परियोजनाओं में उपयोग किया जा सकता है।

इस बाबत नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए ग्राउंड सर्वे करने के लिए भारतीय रेलवे एक हेलिकॉप्टर के जरिए लेजर युक्‍त उपकरण के साथ लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) तकनीक का इस्तेमाल करेगा। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना में लिडार की तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करने के बाद इसका प्रयोग अब इस रूट पर किया जा रहा है। इस तकनीक के साथ, उच्च गुणवत्ता वाले डेटा कम समय में डिजिटल रूप में प्रदान किया जाता है। जारी रिपोर्ट के अनुसार, लिडार प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का उपयोग सड़कों, भूतल परिवहन, नहरों, भूस्खलन, नगर नियोजन, सिंचाई से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं में भी किया जा सकता है।

प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एनएचआरसीएल लिडार तकनीक का प्रयोग करेगा। प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का डीपीआर तैयार करने के लिए जमीनी सर्वे करने के साथ हेलीकॉप्टर पर लेजर इनेबल्ड इक्विपमेंट का इस्तेमाल करते हुए लिडार तकनीक का प्रयोग होगा। सटीक सर्वेक्षण डेटा देने के लिए यह तकनीक उड़ान मापदंडों, लेजर डेटा, जीपीएस डेटा और वास्तविक तस्वीरों के संयोजन का उपयोग करती है। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर, ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज संरेखण, संरचनाओं, गलियारे के लिए भूमि की आवश्यकता, स्टेशनों और डिपो के स्थान, परियोजना से प्रभावित भूखंडों या संरचनाओं की पहचान का निर्णय लिया जाएगा।

भारत में किसी भी रेल परियोजना के लिए पहली बार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए हवाई लिडार सर्वेक्षण तकनीक को मुख्य रूप से इसकी सटीकता के कारण अपनाया गया था। हवाई लिडार तकनीक का उपयोग करते हुए इस परियोजना पर जमीनी सर्वेक्षण पहले से ही चिह्नित जमीन पर कई बिंदुओं के साथ शुरू हो चुका है और आगामी 13 दिसंबर से मौसम की स्थिति के आधार पर एक हेलीकाप्टर पर उपकरणों के माध्यम से डेटा का संग्रह चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा।

प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में मिश्रित इलाके शामिल हैं, जिनमें घनी आबादी वाले शहरी और ग्रामीण इलाके, हाईवे, सड़क, घाट, नदियां के साथ ग्रीन फील्ड भी शामिल हैं। गलियारे की संभावित लंबाई लगभग 800 किलोमीटर तय की गई है। नई दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से दिल्ली का एनसीटी आगरा, मथुरा, लखनऊ, इटावा, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी, भदोही और अयोध्या जैसे बड़े शहरों से जुड़ जाएगा। साथ ही दिल्ली-वाराणसी मुख्य हाई स्पीड कॉरिडोर को अब अयोध्या (फैजाबाद) से भी जोड़ा जाएगा और यह मार्ग जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी जोड़ेगा। जबकि वाराणसी का बाबतपुर एयरपोर्ट और अयोध्‍या में प्रस्‍तावित एयरपोर्ट भी भविष्‍य में इससे जुड़ सकेगा।