May 7, 2021

देश आज मना रहा है Constitution Day, आखिर 26 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है संविधान दिवस

देश आज अपना संविधान दिवस (Constitution Day) मना रहा है | इस खास दिन संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर को याद किया जाता है। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारत के संविधान को अपनाया था, जिसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया. 19 नवंबर 2015 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नागरिकों के बीच संविधान के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने के निर्णय लिया था | यूजीसी द्वारा देश के सभी विश्वविद्यालयों को 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने के आदेश दिए गए हैं।
भारत के संविधान निर्माता के रूप में डॉ. भीमराव अम्बेडकर को पहचाना जाता है। जिन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | यह दुनिया के सभी संविधानों को परखने के बाद बनाया गया। इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 94 संशोधन शामिल हैं। यह हस्तलिखित संविधान है जिसमें 48 आर्टिकल हैं। इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था।
भारत का संविधान दिसंबर 1946 और दिसंबर 1949 के बीच तैयार किया गया | यह बेहद ही चुनौतीपूर्ण समय था, क्योंकि धार्मिक दंगे, जातिगत युद्ध और लैंगिक असमानता देश के सामाजिक ताने-बाने को खतरे में डाल रही थी |
26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा की तरफ से इसे अपनाया गया और 26 नवंबर 1950 को इसे लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया। यह वजह है कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसके लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना की गई थी और इसके अध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई थी।
भारत का संविधान मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों को परिभाषित करने वाली रूप रेखा तैयार करता है, सरकारी संस्थानों की संरचना, प्रक्रियाओं, शक्तियों और कर्तव्यों को स्थापित करता है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों, निदेशात्मक सिद्धांतों और कर्तव्यों को निर्धारित करता है |
संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित और कॉलीग्राफ्ड थी। इसमें किसी भी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का इस्तेमाल नहीं किया गया था। संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को दस्तावेज पर हस्ताक्षेप किए । दो दिन बाद इसे लागू किया गया था।