February 25, 2021

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना: नौकरी पाने और देने वालों को बड़ी राहत, आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को मंजूरी, 58.5 लाख कर्मचारियों को लाभ होगा

कोरोना संकट के बीच देश में रोजगार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को मंजूरी दे दी। इसके तहत सरकार नई नौकरी पाने वाले और नई नौकरी देने वाले, दोनों को भविष्य निधि (पीएफ) पर सरकार 12-12 फीसदी की सब्सिडी देगी। इसके लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 1,584 करोड़ रुपये की धनराशि और पूरी योजना अवधि 2020-2023 के लिए 22,810 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस स्कीम से 58.5 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी।

इस योजना में केंद्र सरकार सरकार 1 अक्तूबर 2020 या उसके बाद और 30 जून, 2021 तक शामिल सभी नए कर्मचारियों को दो वर्ष की अवधि के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी। ये सुविधा उन्हीं संस्थानों को मिल पाएगी जहां 1000 तक कर्मचारी हैं। जिन रोजगार प्रदाता संगठनों में 1000 से अधिक कर्मचारी हैं वहां केन्द्र सरकार नए कर्मचारियों के संदर्भ में दो वर्ष की अवधि के लिए ईपीएफ में केवल 12 प्रतिशत कर्मचारी योगदान देगी। कोई भी ईपीएफ सदस्‍य जिसके पास यूनिवर्सल एकाउंट नंबर है और उसका मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है और यदि उसने कोविड महामारी के दौरान इस वर्ष मार्च से सितंबर के बीच की अवधि में अपनी नौकरी छोड़ दी और उसे ईपीएफ के दायरे में आने वाले किसी रोजगार प्रदाता संस्‍थान में सितंबर तक रोजगार नहीं मिला है तो वह भी इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होगा।

योजना की मुख्य बातें
• 15000 से कम मासिक वेतन वाले कर्मचारी इस योजना के दायरे में आएंगे
• 1 अक्तूबर 2020 से 30 जून 2021 पर नौकरी पर रखे कर्मचारी का 24 फीसदी पीएफ सरकार देगी
• 1000 या उससे से कम कर्मचारी हैं वे आत्मनिर्भर भारत रोजगार के दायरे में आएंगे
• 1000 से ज्यादा कर्मचारी वाले संस्थानों में सरकार सिर्फ 12 प्रतिशत पीएफ अंशदान देगी
• 50 कर्मचारी वाले संस्थान में 2 नए लोगों को नौकरी दी जाती है तो उसे योजना का फायदा मिलेगा
• 50 से ज्यादा कर्मचारी वाले संस्थान को 5 लोगों को नौकरी देनी होगी, तब योजना का फायदा मिलेगा।

रोजगार सृजन पर सरकार का जोर: संतोष गंगवार
संतोष गंगवार ने कहा, “कोरोना महामारी के परिप्रेक्ष्य में आत्मनिर्भर भारत योजगार योजना एक तरफ नए रोजगार सृजन की ओर आवश्यक प्रोत्साहन दे रही है। वहीं, दूसरी तरफ हमने सीधे उद्योगों के रूप में उन्हें वित्तीय मदद पहुंचाने का भी काम किया है। इस योजना के जरिए हमने औपचारिक से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में जाने का काम किया है।” उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हमने उन कर्मचारियों को चुना हैं, जिनका मासिक वेतन 15,000 रुपए से कम है। इस योजना के माध्यम से हम गरीब कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बताने का काम करते हैं।

इस तरह दिया जाएगा लाभ
बयान में कहा गया कि सदस्‍यों के आधार संख्‍या से जुड़े खाते में ईपीएफओ इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से इस योगदान का भुगतान करेगा। इस योजना के लिए ईपीएफओ एक सॉफ्टवेयर को विकसित करेगा और एक पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इस योजना के लिए ईपीएफओ एक सॉफ्टवेयर विकसित करेगा और एक पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। बयान के अनुसार ईपीएफओ योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए एक उपयुक्त तरीका अपनाएगा कि एबीआरवाई और ईपीएफओ की ओर से लागू की गई किसी अन्य योजना के लाभ आपस में परस्पर व्याप्त (ओवरलैपिंग) नहीं हुए हों।

कंपनियों के लिए यह शर्त
आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत ईपीएफओ में रजिस्टर ऐसा हर एंप्लॉयर, जो नए इंप्लॉइज को नियुक्त कर रहा हो, सब्सिडी का पात्र होगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए अधिकतम 50 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नए कर्मचारियों को भर्ती करना होगा, जबकि जिन प्रतिष्ठानों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम पांच नई भर्ती करनी होंगी।

किस कर्मचारी को फायदा
इस योजना के तहत ईपीएफओ में रजिस्टर संस्थान में नियुक्त होने वाला हर वह नया कर्मचारी कवर होगा, जिसका मासिक वेतन 15,000 रुपए से कम है। इसमें 15,000 से कम वेतन पाने वाले ऐसे ईपीएफ मेंबर भी शामिल होंगे, जिन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया था और वे एक अक्तूबर 2020 को या उसके बाद दोबारा नौकरी से जुड़े हैं।

नौकरी के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी
कोरोना के दौरान सरकार ने रोजगार सृजन के लिए स्कीम शुरू की थी। इसके तहत सरकार ईपीएफ में 12 प्रतिशत अंशदान दे रही थी। इससे करीब 1.21 करोड़ लोगों को फायदा मिला। पहले ऑर्गेनाइज सेक्टर में छह करोड़ मजदूर थे। अब यह संख्या 10 करोड़ हो गई है। नई योजना से 15 हजार से कम वेतन वालों की टेक होम सेलरी बढ़ेगी। इससे बाजार में मांग भी बढ़ेगी। लाखों लोगों को इससे नौकरी मिलेगी। पिछली योजना से 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा मिला था।